वाल्मीकि रामायण 6.73.43
सप्तभिस्तु महा वीर्यो मैन्दं मर्मविदारणैः।पञ्चभिर्विशिखैश्चैव गजं विव्याध संयुगे॥
saptabhistu mahā vīryo maindaṃ marmavidāraṇaiḥ |pañcabhirviśikhaiścaiva gajaṃ vivyādha saṃyuge ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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