वाल्मीकि रामायण 6.73.56
उदीक्षमाणा गगनं केचिन्नेत्रेषु ताडिताः।शरैर्विविशुरन्योन्यं पेतुश्च जगतीतले॥
udīkṣamāṇā gaganaṃ kecinnetreṣu tāḍitāḥ |śarairviviśuranyonyaṃ petuśca jagatītale ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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