वाल्मीकि रामायण 6.9.19
विनश्येद्द् हि पुरी लंका शूराः सर्वे च आक्षसाः ।रामस्य दयिता पत्नी न स्वयम् यदि दीयते॥
vinaśyedd hi purī laṃkā śūrāḥ sarve ca ākṣasāḥ |rāmasya dayitā patnī na svayam yadi dīyate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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