वाल्मीकि रामायण 6.9.20
प्रसादये त्वाम् बन्धुत्वात् कुरुष्व वचनम् मम ।हितम् पथ्यम् त्व् अहम् ब्रूमि दीयताम् अस्य मैथिली॥
prasādaye tvām bandhutvāt kuruṣva vacanam mama |hitam pathyam tv aham brūmi dīyatām asya maithilī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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