वाल्मीकि रामायण 6.93.2
युद्धे हतो महाराज लक्ष्मणेन तवात्मजः।विभीषणसहायेन मिषतां नो महाद्युतिः॥
yuddhe hato mahārāja lakṣmaṇena tavātmajaḥ |vibhīṣaṇasahāyena miṣatāṃ no mahādyutiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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