वाल्मीकि रामायण 6.93.29
तस्यैव तपसो व्युष्ट्या प्रसादाच्च स्वयम्भुवः।नासुरेभ्यो न देवेभ्यो भयं मम कदाचन॥
tasyaiva tapaso vyuṣṭyā prasādācca svayambhuvaḥ |nāsurebhyo na devebhyo bhayaṃ mama kadācana ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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