वाल्मीकि रामायण 6.93.39
उद्धृत्य गुणसम्पन्नं विमलाम्बरवर्चसम्।निष्पपात स वेगेन सभार्यः सचिवैर्वृतः॥
uddhṛtya guṇasampannaṃ vimalāmbaravarcasam |niṣpapāta sa vegena sabhāryaḥ sacivairvṛtaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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