वाल्मीकि रामायण 6.93.50
बहुशश्चोदयामास भर्तारं मामनुव्रताम्।भार्या भव रमस्वेति प्रत्याख्यातो ध्रुवं मया॥
bahuśaścodayāmāsa bhartāraṃ māmanuvratām |bhāryā bhava ramasveti pratyākhyāto dhruvaṃ mayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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