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वाल्मीकि रामायण 6.93.54
हनूमतो ऽपि यद्वाक्यं न कृतं क्षुद्रया मया॥
hanūmato 'pi yadvākyaṃ na kṛtaṃ kṣudrayā mayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंहनूमतो ऽपि यद्वाक्यं न कृतं क्षुद्रया मया॥
hanūmato 'pi yadvākyaṃ na kṛtaṃ kṣudrayā mayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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