वाल्मीकि रामायण 6.93.60
इत्येवं मैथिलीं दृष्ट्वा विलपन्तीं तपस्विनीम्।रोहिणीमिव चन्द्रेण विना ग्रहवशं गताम्॥
ityevaṃ maithilīṃ dṛṣṭvā vilapantīṃ tapasvinīm |rohiṇīmiva candreṇa vinā grahavaśaṃ gatām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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