वाल्मीकि रामायण 7.10.15
अथाब्रवीदृशग्रीवः प्रहृष्टेनान्तरात्मना ।प्रणम्य शिरसा देवं हर्षगद्गदया गिरा॥
athābravīdṛśagrīvaḥ prahṛṣṭenāntarātmanā |praṇamya śirasā devaṃ harṣagadgadayā girā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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