वाल्मीकि रामायण 7.10.23
शृणु चापि वरो भूयः प्रीतस्येह शुभो मम ।हुतानि यानि शीर्षाणि पूर्वमग्नौ त्वयानघ॥
śṛṇu cāpi varo bhūyaḥ prītasyeha śubho mama |hutāni yāni śīrṣāṇi pūrvamagnau tvayānagha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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