वाल्मीकि रामायण 7.10.39
अलब्धवरपूर्वेण यत्कृतं राक्षसेन तु ।तदेष वरलब्धः स्याद्भक्षयेद्भुवनत्रयम्॥
alabdhavarapūrveṇa yatkṛtaṃ rākṣasena tu |tadeṣa varalabdhaḥ syādbhakṣayedbhuvanatrayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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