वाल्मीकि रामायण 7.104.17
श्रुत्वा मे देवदेवस्य वाक्यं परममद्भुतम् ।प्रीतिर्हि महती जाता तवागमनसम्भवा॥
śrutvā me devadevasya vākyaṃ paramamadbhutam |prītirhi mahatī jātā tavāgamanasambhavā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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