वाल्मीकि रामायण 7.22.49
दशग्रीवस्तु तं जित्वा नाम विश्राव्य चात्मनः ।आरुह्य पुष्पकं भूयो निष्क्रान्तो यमसादनात्॥
daśagrīvastu taṃ jitvā nāma viśrāvya cātmanaḥ |āruhya puṣpakaṃ bhūyo niṣkrānto yamasādanāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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