वाल्मीकि रामायण 7.28.3
सुरथेनाग्निवर्णेन कामगेन महारथः ।अभिदुद्राव सेनां तां वनान्यग्निरिव ज्वलन्॥
surathenāgnivarṇena kāmagena mahārathaḥ |abhidudrāva senāṃ tāṃ vanānyagniriva jvalan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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