वाल्मीकि रामायण 7.28.48
तथैव च महाबाहुर्दशग्रीवो व्यवस्थितः ।शक्रं कार्मुकविभ्रष्टैः शरवर्षैरवाकिरत्॥
tathaiva ca mahābāhurdaśagrīvo vyavasthitaḥ |śakraṃ kārmukavibhraṣṭaiḥ śaravarṣairavākirat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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