वाल्मीकि रामायण 7.33.2
ततः पुत्रकृतस्नेहात्कम्प्यमानो महाधृतिः ।माहिष्मतीपतिं द्रष्टुमाजगाम महानृषिः॥
tataḥ putrakṛtasnehātkampyamāno mahādhṛtiḥ |māhiṣmatīpatiṃ draṣṭumājagāma mahānṛṣiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें