वाल्मीकि रामायण 7.33.8
ततस्तमृषिमायान्तमुद्यन्तमिव भास्करम् ।अर्जुनो दृश्य सम्भ्रान्तो ववन्देन्द्र इवेश्वरम्॥
tatastamṛṣimāyāntamudyantamiva bhāskaram |arjuno dṛśya sambhrānto vavandendra iveśvaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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