वाल्मीकि रामायण 7.35.63
तद्यामस्तत्र यत्रास्ते मारुतो रुक्प्रदो हि नः ।मा विनाशं गमिष्याम अप्रसाद्यादितेः सुताः॥
tadyāmastatra yatrāste māruto rukprado hi naḥ |mā vināśaṃ gamiṣyāma aprasādyāditeḥ sutāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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