वाल्मीकि रामायण 7.36.12
अहमस्य प्रदास्यामि परमं वरमद्भुतम् ।इतः प्रभृति वज्रस्य ममावध्यो भविष्यति॥
ahamasya pradāsyāmi paramaṃ varamadbhutam |itaḥ prabhṛti vajrasya mamāvadhyo bhaviṣyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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