वाल्मीकि रामायण 7.36.27
सो ऽपि गन्धवहः पुत्रं प्रगृह्य गृहमानयत् ।अञ्जनायास्तमाचख्यौ वरदत्तं विनिर्गतः॥
so 'pi gandhavahaḥ putraṃ pragṛhya gṛhamānayat |añjanāyāstamācakhyau varadattaṃ vinirgataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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