वाल्मीकि रामायण 7.36.57
पौरजानपदान्स्थाप्य स्वकार्येष्वहमागतः ।क्रतूनेव करिष्यामि प्रभावाद्भवतां सताम्॥
paurajānapadānsthāpya svakāryeṣvahamāgataḥ |kratūneva kariṣyāmi prabhāvādbhavatāṃ satām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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