वाल्मीकि रामायण 7.41.21
ईदृशो ऽनश्वरो राजा भवेदिति नरेश्वरः ।कथयन्ति पुरे राजन्पौरजानपदास्तथा॥
īdṛśo 'naśvaro rājā bhavediti nareśvaraḥ |kathayanti pure rājanpaurajānapadāstathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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