वाल्मीकि रामायण 7.44.1
विसृज्य तु सुहृद्वर्गं बुद्ध्या निश्चित्य राघवः ।समीपे द्वाःस्थमासीनमिदं वचनमब्रवीत्॥
visṛjya tu suhṛdvargaṃ buddhyā niścitya rāghavaḥ |samīpe dvāḥsthamāsīnamidaṃ vacanamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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