वाल्मीकि रामायण 7.45.24
एवमुक्त्वा तु काकुत्स्थो बाष्पेण पिहिताननः ।प्रविवेश स धर्मात्मा भ्रातृभिः परिवारितः॥
evamuktvā tu kākutstho bāṣpeṇa pihitānanaḥ |praviveśa sa dharmātmā bhrātṛbhiḥ parivāritaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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