वाल्मीकि रामायण 7.47.5
श्रेयो हि मरणं मे ऽद्य मृत्युर्वा यत्परं भवेत् ।न चास्मिन्नीदृशे कार्ये नियोज्यो लोकनिन्दिते॥
śreyo hi maraṇaṃ me 'dya mṛtyurvā yatparaṃ bhavet |na cāsminnīdṛśe kārye niyojyo lokanindite ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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