वाल्मीकि रामायण 7.53.25
कार्यार्थिनां विमर्दो हि राज्ञां दोषाय कल्पते ।तच्छीघ्रं दर्शनं मह्यमभिवर्तन्तु कार्यिणः॥
kāryārthināṃ vimardo hi rājñāṃ doṣāya kalpate |tacchīghraṃ darśanaṃ mahyamabhivartantu kāryiṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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