वाल्मीकि रामायण 7.65.36
कालो द्वादश वर्षाणि शापस्यान्तो भविष्यति ।मत्प्रासादाच्च राजेन्द्र व्यतीतं न स्मरिष्यसि॥
kālo dvādaśa varṣāṇi śāpasyānto bhaviṣyati |matprāsādācca rājendra vyatītaṃ na smariṣyasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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