वाल्मीकि रामायण 7.67.24
लोकानां स्वस्ति चैव स्यात्कृते कर्मणि च त्वया ।एतत्ते सर्वमाख्यातं लवणस्य दुरात्मनः॥
lokānāṃ svasti caiva syātkṛte karmaṇi ca tvayā |etatte sarvamākhyātaṃ lavaṇasya durātmanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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