वाल्मीकि रामायण 7.77.4
तस्यारण्यस्य मध्ये तु सरो योजनमायतम् ।हंसकारण्डवाकीर्णं चक्रवाकोपशोभितम्॥
tasyāraṇyasya madhye tu saro yojanamāyatam |haṃsakāraṇḍavākīrṇaṃ cakravākopaśobhitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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