वाल्मीकि रामायण 7.77.6
अरजस्कं तथा ऽक्षोभ्यं श्रीमत्पक्षिगणायुतम् ।समीपे तस्य सरसो महदद्भुतमाश्रमम्॥
arajaskaṃ tathā 'kṣobhyaṃ śrīmatpakṣigaṇāyutam |samīpe tasya saraso mahadadbhutamāśramam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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