वाल्मीकि रामायण 7.83.19
एष्यदस्मदभिप्रायाद्राजसूयात्क्रतूत्तमात् ।निवर्तयामि धर्मज्ञ तव सुव्याहृतेन च॥
eṣyadasmadabhiprāyādrājasūyātkratūttamāt |nivartayāmi dharmajña tava suvyāhṛtena ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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