वाल्मीकि रामायण 7.84.13
यद्यसौ तप आतिष्ठेद्भूय एवासुरेश्वर ।यावल्लोका धरिष्यन्ति तावदस्य वशानुगाः॥
yadyasau tapa ātiṣṭhedbhūya evāsureśvara |yāvallokā dhariṣyanti tāvadasya vaśānugāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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