वाल्मीकि रामायण 7.87.28
राजन्पुरुषभूतस्त्वं स्त्रीभावं न स्मरिष्यसि ।स्त्रीभूतश्च परं मासं न स्मरिष्यसि पौरुषम्॥
rājanpuruṣabhūtastvaṃ strībhāvaṃ na smariṣyasi |strībhūtaśca paraṃ māsaṃ na smariṣyasi pauruṣam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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