वाल्मीकि रामायण 7.89.1
श्रुत्वा किम्पुरुषोत्पत्तिं लक्ष्मणो भरतस्तदा ।आश्चर्यमिति चाब्रूतामुभौ रामं जनेश्वरम्॥
śrutvā kimpuruṣotpattiṃ lakṣmaṇo bharatastadā |āścaryamiti cābrūtāmubhau rāmaṃ janeśvaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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