वाल्मीकि रामायण 7.89.24
जातमात्रं तु सुश्रोणी पितुर्हस्ते न्यवेशयत् ।बुधस्य समवर्णभमिला पुत्रं महाबलम्॥
jātamātraṃ tu suśroṇī piturhaste nyaveśayat |budhasya samavarṇabhamilā putraṃ mahābalam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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