वाल्मीकि रामायण 7.91.3
एतान्सर्वान्समानीय मन्त्रयित्वा च लक्ष्मण ।हयं लक्षणसम्पन्नं विमोक्ष्यामि समाधिना॥
etānsarvānsamānīya mantrayitvā ca lakṣmaṇa |hayaṃ lakṣaṇasampannaṃ vimokṣyāmi samādhinā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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