वाल्मीकि रामायण 7.95.4
छन्दं मुनेश्च विज्ञाय सीतायाश्च मनोगतम् ।प्रत्ययं दातुकामायास्ततः शंसत मे लघु॥
chandaṃ muneśca vijñāya sītāyāśca manogatam |pratyayaṃ dātukāmāyāstataḥ śaṃsata me laghu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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