पत्र खुल रहा है
लोड हो रहा है…पत्र खुल रहा है
लोड हो रहा है…
आचार्य: सूत्रधार ऋषिआचार्य के बोलते ही उपशीर्षक यहाँ दिखेगा।
वाल्मीकि का नारद से प्रश्न, क्रौंच पक्षी, और कैसे शोक पहला श्लोक बना।
को न्वस्मिन् साम्प्रतं लोके गुणवान् कश्च वीर्यवान्।
धर्मज्ञश्च कृतज्ञश्च सत्यवाक्यो दृढव्रतः॥लिप्यंतरण: ko nv asmin sāmprataṃ loke guṇavān kaś ca vīryavān | dharmajñaś ca kṛtajñaś ca satyavākyo dṛḍhavrataḥ ||
मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।
यत्क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम्॥लिप्यंतरण: mā niṣāda pratiṣṭhāṃ tvam agamaḥ śāśvatīḥ samāḥ | yat krauñca-mithunād ekam avadhīḥ kāma-mohitam ||
इस प्रवचन का हर श्लोक इन ग्रंथों से मिलाया जा सकता है।
Valmiki Ramayana, Bala Kanda
1.1.2
Valmiki Ramayana, Bala Kanda
Sarga 1 (Narada's summary, paraphrased)
Valmiki Ramayana, Bala Kanda
1.2.15 (Gita Press numbering)
Valmiki Ramayana, Bala Kanda
Sarga 2 (shoka becomes shloka; Brahma's request, paraphrased)
यह प्रवचन हमारे विद्वान समीक्षकों द्वारा समीक्षित ग्रंथ-पाठ से सुनाया गया है। आचार्य पात्र एक कलात्मक प्रस्तुति है।
सूत्रधार ऋषि एक कलात्मक पात्र हैं, कोई ऐतिहासिक व्यक्ति नहीं। जहाँ कोई कथा मूल पाठ के बजाय बाद की परंपरा से आती है, वहाँ वे यह स्पष्ट बताते हैं।