पत्र खुल रहा है
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दीपक 6 नव॰, 6:00 am IST पर जलेगा
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यह प्रवचन अभी जारी नहीं हुआ है
ऐसा जीवन क्यों संभव है जिसमें 'पर्याप्त' हो, और संतोष को सबसे बड़ा लाभ क्यों कहा गया है।
6 नव॰, 6:00 am IST से आरंभ
इस प्रवचन का हर श्लोक इन ग्रंथों से मिलाया जा सकता है।
Mahabharata, Udyoga Parva
5.39.68
Mahabharata, Udyoga Parva
5.40.12
यह प्रवचन हमारे विद्वान समीक्षकों द्वारा समीक्षित ग्रंथ-पाठ से सुनाया गया है। आचार्य पात्र एक कलात्मक प्रस्तुति है।
चाणक्य का यह पात्र पारंपरिक वर्णनों पर आधारित एक कलात्मक प्रस्तुति है। उनके जीवन के विवरणों पर इतिहासकारों में मतभेद हैं।