पत्र खुल रहा है
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दीपक 12 नव॰, 6:00 am IST पर जलेगा
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यह प्रवचन अभी जारी नहीं हुआ है
स्थिर मन विपत्ति का सामना कैसे करता है: अप्राप्य की चाह नहीं, खोए का शोक नहीं, और काँपे बिना प्रयत्न।
12 नव॰, 6:00 am IST से आरंभ
इस प्रवचन का हर श्लोक इन ग्रंथों से मिलाया जा सकता है।
Mahabharata, Udyoga Parva
5.33.23
Mahabharata, Udyoga Parva
5.33.88
यह प्रवचन हमारे विद्वान समीक्षकों द्वारा समीक्षित ग्रंथ-पाठ से सुनाया गया है। आचार्य पात्र एक कलात्मक प्रस्तुति है।
चाणक्य का यह पात्र पारंपरिक वर्णनों पर आधारित एक कलात्मक प्रस्तुति है। उनके जीवन के विवरणों पर इतिहासकारों में मतभेद हैं।