पत्र खुल रहा है
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आचार्य: आचार्य चाणक्यआचार्य के बोलते ही उपशीर्षक यहाँ दिखेगा।
चाणक्य नीति क्या है, क्या नहीं है, और इसके आरंभिक श्लोकों का वचन।
प्रणम्य शिरसा विष्णुं त्रैलोक्याधिपतिं प्रभुम्।
नानाशास्त्रोद्धृतं वक्ष्ये राजनीतिसमुच्चयम्॥लिप्यंतरण: praṇamya śirasā viṣṇuṃ trailokyādhipatiṃ prabhum | nānā-śāstroddhṛtaṃ vakṣye rāja-nīti-samuccayam ||
इस प्रवचन का हर श्लोक इन ग्रंथों से मिलाया जा सकता है।
Chanakya Niti
1.1 (common vulgate numbering)
Chanakya Niti
1.2–1.3 (paraphrased; numbering varies by edition)
Hemachandra, Parishishtaparvan
Chandragupta episode (paraphrased story from later tradition)
यह प्रवचन हमारे विद्वान समीक्षकों द्वारा समीक्षित ग्रंथ-पाठ से सुनाया गया है। आचार्य पात्र एक कलात्मक प्रस्तुति है।
चाणक्य का यह पात्र पारंपरिक वर्णनों पर आधारित एक कलात्मक प्रस्तुति है। उनके जीवन के विवरणों पर इतिहासकारों में मतभेद हैं।