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महाभारत 1.1.121
यदाश्रौषं मन्त्रिणं वासुदेवं; तथा भीष्मं शांतनवं च तेषाम्भारद्वाजं चाशिषोऽनुब्रुवाणं; तदा नाशंसे विजयाय संजय
yadāśrauṣaṃ mantriṇaṃ vāsudevaṃ; tathā bhīṣmaṃ śāṃtanavaṃ ca teṣāmbhāradvājaṃ cāśiṣo'nubruvāṇaṃ; tadā nāśaṃse vijayāya saṃjaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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