महाभारत 1.1.31
प्राचेतसस्तथा दक्षो दक्षपुत्राश्च सप्त येततः प्रजानां पतयः प्राभवन्नेकविंशतिः
prācetasastathā dakṣo dakṣaputrāśca sapta yetataḥ prajānāṃ patayaḥ prābhavannekaviṃśatiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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