महाभारत 1.1.32
पुरुषश्चाप्रमेयात्मा यं सर्वमृषयो विदुःविश्वेदेवास्तथादित्या वसवोऽथाश्विनावपि
puruṣaścāprameyātmā yaṃ sarvamṛṣayo viduḥviśvedevāstathādityā vasavo'thāśvināvapi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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