महाभारत 1.1.35
संवत्सरर्तवो मासाः पक्षाहोरात्रयः क्रमात्यच्चान्यदपि तत्सर्वं संभूतं लोकसाक्षिकम्
saṃvatsarartavo māsāḥ pakṣāhorātrayaḥ kramātyaccānyadapi tatsarvaṃ saṃbhūtaṃ lokasākṣikam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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