महाभारत 1.1.64
नारदोऽश्रावयद्देवानसितो देवलः पितॄन्गन्धर्वयक्षरक्षांसि श्रावयामास वै शुकः
nārado'śrāvayaddevānasito devalaḥ pitṝngandharvayakṣarakṣāṃsi śrāvayāmāsa vai śukaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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