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महाभारत 1.1.75
स्वागतं सर्वथा दिष्ट्या पाण्डोः पश्याम संततिम्उच्यतां स्वागतमिति वाचोऽश्रूयन्त सर्वशः
svāgataṃ sarvathā diṣṭyā pāṇḍoḥ paśyāma saṃtatimucyatāṃ svāgatamiti vāco'śrūyanta sarvaśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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