महाभारत 1.1.7
कुत आगम्यते सौते क्व चायं विहृतस्त्वयाकालः कमलपत्राक्ष शंसैतत्पृच्छतो मम
kuta āgamyate saute kva cāyaṃ vihṛtastvayākālaḥ kamalapatrākṣa śaṃsaitatpṛcchato mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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